- 250 नई बसें खरीदेगी सरकार
- वन दरोगा के लिए अब स्नातक जरूरी
- मदरसों को मिली नई सुविधा
देहरादून: उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में 17 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक में परिवहन, वन, शिक्षा, कुम्भ मेला-2027, मदरसा संबद्धता और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े अहम फैसले लिए गए।
सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में परिवहन विभाग को 250 नई बसें खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा पहले स्वीकृत 100 बसों की संख्या अब जीएसटी दर कम होने के कारण बढ़ाकर 109 कर दी गई है।
वन विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी दी गई। अब वन दरोगा (वन उपदर्शक) के पद के लिए शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट से बढ़ाकर स्नातक कर दी गई है। वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष और वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से 25 वर्ष निर्धारित की गई है।
कुम्भ मेला-2027 की तैयारियों को तेज करने के लिए 1 करोड़ तक के कार्य मेलाधिकारी और 5 करोड़ तक के कार्य आयुक्त गढ़वाल मंडल द्वारा स्वीकृत किए जा सकेंगे। 5 करोड़ से अधिक के कार्यों के लिए पूर्व की भांति शासन से स्वीकृति लेनी होगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत मदरसों की संबद्धता को आसान बनाया गया है। अब कक्षा 1 से 8 तक संचालित मदरसों की संबद्धता जिला स्तरीय शिक्षा समिति या सक्षम अधिकारी द्वारा दी जाएगी, जबकि कक्षा 9 से 12 तक के मदरसों को विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर से संबद्धता लेनी होगी। राज्य में वर्तमान में 452 मदरसे संचालित हैं।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले:
- उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नियमावली में संशोधन कर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को पदेन सदस्य बनाने और एसिड अटैक पीड़ितों को निःशुल्क विधिक सहायता देने का प्रावधान किया गया।
- उप खनिज परिहार नियमावली में रॉयल्टी की दर ₹7 से बढ़ाकर ₹8 प्रति क्विंटल कर दी गई।
- वन क्षेत्रों की सीमा पर मौन पालन को बढ़ावा देने के लिए “उत्तराखंड वन सीमांत मौनपालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-हाथी संघर्ष न्यूनीकरण नीति” को मंजूरी दी गई।
- संस्कृत शिक्षा शैक्षिक संवर्ग सेवा नियमावली-2026 को प्रख्यापित करने की अनुमति प्रदान की गई।
- 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों में भी मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना लागू करने का निर्णय लिया गया।
कैबिनेट ने कार्मिक विभाग, आबकारी नीति, अधिप्राप्ति नियमावली, विशेष शिक्षा शिक्षक नियमावली और पेंशन संबंधी मामलों पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
इन फैसलों से परिवहन व्यवस्था मजबूत होने, कुम्भ मेला की तैयारियां सुगम होने, वन विभाग में भर्ती प्रक्रिया अधिक गुणवत्तापूर्ण होने और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को सुविधा मिलने की उम्मीद है।