पाकिस्तान के आईपी एड्रेस से फोन कर KBC के नाम पर 12 करोड़ ठगने वाले हुए गिरफ्तार

कौन बनेगा करोड़पति (केबीसी) में लॉटरी का पैसा दिलवाने का लालच देकर लोगों को ठगने वाले दो साइबर ठगों को एसटीएफ ने तमिलनाडु से गिरफ्तार किया है। ठगों का जाल पूरे देश में फैला हुआ है। ये एक प्रतिष्ठित कंपनी के डीलर हैं और अपने एक बॉस को ठगा गया करोड़ों रुपये श्रीलंका और दुबई में भेजते थे। करीब पांच साल में आरोपी 12 करोड़ से ज्यादा रुपये लोगों से ठग चुके हैं। आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।

साइबर ठग लोगों को ठगने के लिए नए नए तरीके अपना रहे हैं। एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि पिछले दिनों साइबर थाने में एक व्यक्ति ने शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार उसे एक का फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को कौन बनेगा करोड़पति की टीम का मेंबर बताया और कहा कि उनकी 25 लाख रुपये की लॉटरी लगी है। यह पैसा भेजने के नाम पर व्यक्ति से कभी किसी शुल्क तो कभी किसी और बहाने सात लाख रुपये जमा करा लिए गए। शिकायत पर साइबर थाने में ही मुकदमा दर्ज किया गया और मामले की जांच शुरू की गई।
पता चला कि जिन नंबरों से कॉल की गई थी वह कर्नाटक और बिहार रीजन के हैं। इस पर एसटीएफ ने उन खातों की डिटेल निकलवाई जिनमें रुपया जमा कराया गया था। यह सब खाते उत्तर प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों के विभिन्न बैंकों के थे। इनमें यह सिर्फ सात लाख रुपये ही नहीं बल्कि देशभर से करोड़ों रुपये जमा किए गए थे।

करीब एक करोड़ रुपये से ज्यादा की डिटेल तो एसटीएफ ने जुटा ही ली थी। सारी जानकारी और टेलीफोन लोकेशन निकलवाने के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में तमिलनाडु के तिरुवेनवेली तक पहुंच गई। यहां से इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में इन्होंने अपने नाम वलीनायंगम और पी जॉनसन बताए।

पाकिस्तान के आईपी एड्रेस हुआ इस्तेमाल 
एसटीएफ ने जब जांच शुरू की तो पता चला कि इन्होंने अधिकतर कॉल व्हाट्सएप से की थी। इनमें पाकिस्तान का आईपी एड्रेस इस्तेमाल किया गया था। साथ ही दुबई के आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर भी कई कॉल की गई।

पांच साल में 12 करोड़ से ज्यादा की ठगी
पूछताछ में पता चला कि आरोपी एक प्रतिष्ठित कंपनी के डीलर हैं और ठगी के धंधे में उनके कुछ सीनियर भी शामिल हैं। भारत से इस तरह से ठगी गई रकम में से वे केवल तीन से पांच प्रतिशत रखते हैं और बाकी दुबई और श्रीलंका में मौजूद सीनियरों को भेज देते हैं। करीब पांच साल में आरोपी 12 करोड़ से ज्यादा रुपये लोगों से ठग चुके हैं।

पहले ऐसे किसी भी ऑफर की जांच करें, +92 और +97 नंबरों से आने वाले फोन/वाट्सअप कॉल से सावधान रहें। इन नंबरों से मिले किसी भी प्रकार के लॉटरी या अन्य किसी प्रकार के लालच में न आएं। कोई भी शक होने पर तत्काल नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून से संपर्क करें।

 

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