देहरादून: उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने की दिशा में देश का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र का स्वर्णिम अध्याय करार दिया।
सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कुसुम कंडवाल ने 16 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले संसद के विशेष सत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यह बैठक अधिनियम को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक मोड़ साबित होगी। उनके साथ समाजसेवी डॉ. पारुल दीक्षित और अधिवक्ता शिखा शर्मा बिष्ट भी मौजूद रहीं।
अध्यक्ष कंडवाल ने बताया कि यह संवैधानिक संशोधन लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) आरक्षण सुनिश्चित करेगा। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि 1952 में लोकसभा में महिलाओं की संख्या मात्र 22 थी, जो 2024 में बढ़कर 75 हो गई है, लेकिन अभी भी यह पर्याप्त नहीं है। इस अधिनियम के माध्यम से महिलाओं को शासन के केंद्र में लाकर इस खाई को पाटा जाएगा।
कुसुम कंडवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘महिला-नेतृत्व वाले विकास’ के विजन की सराहना करते हुए जोर देकर कहा, “जब महिलाएँ नेतृत्व करती हैं, तो अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है और समावेशी विकास सुनिश्चित होता है।”
वैश्विक शोध का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि लैंगिक समानता बढ़ने से विश्व अर्थव्यवस्था में 7 ट्रिलियन डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
प्रेस वार्ता में महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई प्रभावशाली आंकड़े साझा किए गए। मुद्रा योजना के तहत 69% ऋण महिलाओं को दिए गए, जन धन योजना में 32.29 करोड़ महिलाओं के बैंक खाते खुले, ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ से माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का नामांकन 80.2% तक पहुंचा। भारत में 43% STEM ग्रेजुएट महिलाएं हैं और सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन और प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा प्रदान की है।
कंडवाल ने कहा कि जब महिलाओं को संवैधानिक अवसर मिलते हैं, तो वे जल, शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों पर क्रांतिकारी बदलाव लाती हैं। यह अधिनियम 2047 के विकसित भारत के संकल्प की मजबूत आधारशिला बनेगा।
उत्तराखंड को ‘देवभूमि के साथ-साथ नारी शक्ति की भूमि’ बताते हुए उन्होंने कहा कि राज्य महिला आयोग इस अधिनियम के सफल क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़े और लोकतंत्र अधिक संवेदनशील व पारदर्शी बने।
अंत में कुसुम कंडवाल ने समस्त मातृशक्ति और पूरे समाज से इस ऐतिहासिक बदलाव का समर्थन करने की अपील की।
