अल्मोड़ा: उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है। सुप्रसिद्ध लोकगायक दीवान सिंह कंवल जी का निधन केवल उनके परिवार या संगीत जगत की हानि नहीं है, बल्कि यह पूरे पहाड़ की उस आवाज़ का मौन हो जाना है, जो दशकों तक हमारी माटी की पहचान बनी रही।
दीवान कनवाल ‘दीवान दा’ का बुधवार सुबह निधन हो गया। वह करीब 67 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से अल्मोड़ा सहित पूरे प्रदेश के सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यालय के खत्याड़ी गांव निवासी दीवान कनवाल पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका उपचार हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में चल रहा था और हाल ही में उनका ऑपरेशन भी हुआ था। उपचार के बाद वह कुछ दिन पहले ही अपने घर लौटे थे, लेकिन बुधवार सुबह अपने आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। दीवान कनवाल अपने पीछे वृद्ध माता, दो विवाहित पुत्रों और दो पुत्रियों को छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का पहले ही निधन हो चुका है। स्थानीय लोगों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर बाद बेतालेश्वर घाट में किया गया, जहां उन्हें नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।
सीएम धामी ने जताया दुख:
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने कहा कि दीवान कनवाल का निधन उत्तराखंड की लोक कला और सांस्कृतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों एवं उनके प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने व्यक्त की शोक संवेदना
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने भी प्रसिद्ध लोक कलाकार दीवान कनवाल के निधन पर दुख व्यक्त किया. राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। अल्मोड़ा के पूर्व विधायक रघुनाथ सिंह चौहान ने भी लोकगायक दीवान कनवाल को श्रद्धांजलि दी है।
