कर्ज देने वाले मोबाइल ऐप के खिलाफ सरकारी एजेंसियां हुई सख्त

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कर्ज देने वाले मोबाइल ऐप के खिलाफ सरकारी एजेंसियों को सख्त कार्रवाई करने को कहा है. इस सरकारी निर्देश के बाद उन मोबाइल ऐप के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लिया जा सकेगा जो कर्ज देने के नाम पर आम लोगों को ठगते हैं. कई बार ऐसा होता है कि जरूरतमंद व्यक्ति इस तरह के ऐप के जाल में फंस जाता है और बाद में लोन रिकवरी के नाम पर उसके साथ ज्यादती होती है. देश में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जब ऐप कंपनियों की प्रताड़ना से तंग आकर कर्जदार ने खुदकुशी कर ली.

सरकार का सख्त निर्देश

गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि इस मुद्दे का राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा गंभीर असर हो रहा है. इसमें कहा गया कि देशभर से बड़ी संख्या में ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि डिजिटल तरीके से कर्ज देने वाली गैरकानूनी ऐप विशेषकर कमजोर और निम्न आय वर्ग के लोगों को शिकार बनाती हैं. ऐसी मोबाइल ऐप ऊंची ब्याज दरों पर कम अवधि के कर्ज या छोटे कर्ज देती हैं और इसमें छिपे शुल्क (हिडेन चार्ज) भी होते हैं.

लोन के नाम पर लोगों से ठगी

ये कंपनियां कर्जदारों के कांटेक्ट, स्थान, तस्वीरों और वीडियो जैसे सीक्रेट निजी डेटा का इस्तेमाल कर उनका उत्पीड़न करती हैं और उन्हें डराकर उन्हें ब्लैकमेल भी करती हैं. मंत्रालय ने कहा, कर्ज देने वाली इन गैरकानूनी कंपनियों के खराब रवैये के कारण देशभर में कई लोगों की जान चली गई है. इस मुद्दे का राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ा है.

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