देहरादून । देहरादून में एक शानदार गढ़वाली गीत रिलीज किया गया। इस मौके पर लोकसाहित्य से जुड़ी कई हस्तियां भी इकट्ठा हुई और उन्होंने लोक पर खूब चर्चा की।
जो गीत रिलीज हुआ उसके बोल हैं- चल रे दगड्या
गीत नवनीत बिष्ट और अजय अनंत ने लिखा है। संगीत पांडवाज के ईशान डोभाल का है। मोहित नेगी ने गीत गाया है। अनिल नौटियाल, गोपेश कुमार और शीतल भंडारी ने अभिनय किया है।
इस मौके पर प्रसिद्ध लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी भी मौजूद थे। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद नेगी जी ने अपने संबोधन में कहा भी कि पहाड़ को जिन नये गीतकारों और रचनाकारों की तलाश थी, लगता है वह तलाश अब पूरी होने जा रही है। उन्होंने नये रचनाकारों को सलाह दी कि वे एक-एक शब्द दस बार देखें और उसके तमाम अर्थों में जाएं। खूबसूरत से खूबसूरत शब्द प्रयोग करें। गीत में आये खुदा मिटौण शब्द का उदाहरण देते हुए नेगी जी ने कहा कि जैसे प्यास मिटाने वाली चीज नहीं है, वैसे खुद भी मिटाने वाली चीज नहीं है। खुद मिटाने की जगह खुद बिसरौण शब्द ज्याद सटीक है। जैसे तीस मिटौण नहीं तीस बुझौण शब्द ज्यादा अच्छा है। उन्होंने गीत को बेहतरीन बताया, लेकिन यह भी कहा कि किसी भी काम में लगातार सुधार किये जाने चाहिए।
गीत का लिंक
