देहरादून: उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग ने पिछले साल दिसंबर महीने में स्टाफ नर्सों की भर्ती का पिटारा खोला था. स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद द्वारा 1,238 पदों पर 14 दिसंबर से ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरा जाना शुरू हो गया था. लेकिन इस भर्ती के लिए जारी किए गए कड़े मानकों के चलते नर्सिंग की पढ़ाई कर चुके बेरोजगार युवा असमंजस में फंस गए थे. जिसके बाद वह लगातार राज्य सरकार से स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए जारी किए गए मानकों में संशोधन करने की मांग कर रहे थे. हालांकि इस सिलसिले में बेरोजगारों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को पत्र भी लिखा था.
वहीं कोविड-19 से जंग जीतने के बाद मंगलवार से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, शासकीय कार्यों को निपटाने में जुट गए हैं. इसी क्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सबसे पहला निर्णय नर्सिंग भर्ती के मानकों में संशोधन करने का लिया. नर्सिंग बेरोजगार संगठन की ओर से दिए ज्ञापन का संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री ने सचिव स्वास्थ्य को निर्देश दिए कि 30 बेड के अस्पताल में एक साल के अनुभव की शर्त को हटा दिया जाए. ताकि सभी नर्सिंग प्रशिक्षित युवाओं को इसका लाभ मिल सके.
वहीं, सचिव स्वास्थ्य अमित नेगी ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार नर्सिंग भर्ती के लिए अब 30 बेड के अस्पताल में एक साल के अनुभव की शर्त को हटाया जाएगा. इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के सम्मुख रखेंगे. इस संशोधन के बाद फार्म 16 की अनिवार्यता भी स्वत: ही खत्म हो जाएगी. साथ ही 30 बेड के अस्पताल में एक साल के अनुभव की शर्त भी हट जाएगी. कैबिनेट निर्णय के बाद नर्सिंग प्रशिक्षित बेरोजगार इसके लिए नर्सिंग भर्ती के लिए पात्र हो जाएंगे.
