श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल: कैंसर से डर नहीं, जागरूकता और समय पर उपचार से मुकाबले का संदेश

  • ब्लड कैंसर जनजागरूकता पर एकजुट हुए विषय विशेषज्ञ
  • पोस्टर प्रतियोगिता में शबीना एवं शोएब संयुक्त रूप से प्रथम
  • प्रतिभा नौटियाल द्वितीय और रश्मि तृतीय
  • स्लोगन प्रतियोगिता में कल्पना प्रथम
  • वैशाली द्वितीय और भारती तृतीय कैंसर सर्वाइवर्स ने साझा किए अनुभव
  • योगाभ्यास के माध्यम से दिया स्वस्थ जीवनशैली का संदेश

देहरादून: कैंसर के खिलाफ जंग में जागरूकता को सबसे प्रभावी हथियार बताते हुए शुक्रवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में “कैंसर हारेगा, जिंदगी जीतेगी” का संदेश गूंजा। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित ब्लड कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में चिकित्सकों ने ब्लड कैंसर के लक्षण, समय पर जांच, आधुनिक उपचार, बचाव एवं रोकथाम के साथ ही कैंसर से जुड़े भय को दूर करने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में पोस्टर एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं के माध्यम से भी जागरूकता का संदेश दिया गया। इस अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में शबीना एवम् शोएब ने संयक्त रूप से प्रथम, प्रतिभा नौटियाल ने द्वितीय और रश्मि ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। स्लोगन प्रतियोगिता में कल्पना अव्वल रही, वैशाली ने दूसरा और भारती ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. डॉ. नीलकमल कुमार, डायरेक्टर एवम् विभागाध्यक्ष, ब्रेस्ट एण्ड थायरायड कैंसर सर्जरी, श्रीमहंत इन्दिरेश अस्पताल, डॉ. उत्कर्ष शर्मा, प्राचार्य, श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज, डॉ. अनिल मलिक, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल तथा डॉ. निशांत सिन्हा, वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।प्रो. डॉ. नीलकमल कुमार, डायरेक्टर एवम् विभागाध्यक्ष, ब्रेस्ट एण्ड थायरायड कैंसर सर्जरी ने कहा कि कैंसर से डर पैदा होता है और यह डर जागरूकता की कमी से उपजता है। जैसे ही किसी व्यक्ति को कैंसर शब्द सुनाई देता है, उसके मन में घबराहट और भय पैदा हो जाता है। ऐसे में कैंसर के प्रति जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में कैंसर सर्वाइवर्स और कैंसर वॉरियर्स की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। जब वे अपने संघर्ष, उपचार, चुनौतियों और स्वस्थ होने की यात्रा को साझा करते हैं तो इससे मरीजों और उनके परिजनों को जो हौसला मिलता है, उसका प्रभाव किसी भी व्याख्यान से कहीं अधिक होता है।

उन्होंने कहा कि कैंसर की उपचार यात्रा के दौरान तनाव और भावनात्मक कठिनाइयों के समय परिवार, मित्रों और चिकित्सकों का सहयोग बेहद आवश्यक होता है। यह सहयोग मरीज को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने और उपचार की कठिन यात्रा का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में मरीजों को चिकित्सा उपचार के साथ-साथ इस भावनात्मक एवं सामाजिक सहयोग को भी विशेष महत्व दिया जाता है।प्रो. डॉ. नीलकमल कुमार ने कहा कि किफायती दरों पर कैंसर का उपचार मरीजों के घर के नजदीक उपलब्ध कराना तथा समाज के हर वर्ग तक कैंसर उपचार की पहुंच सुनिश्चित करना श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि कैंसर सर्वाइवर्स के पुनर्वास और उन्हें सम्मानजनक एवं सार्थक तरीके से पु

नः समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी कैंसर केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अपने संदेश में कहा, “कैंसर केवल उपचार की जाने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी यात्रा है जिसमें मरीज को निरंतर सहयोग, हौसले और संवेदनशील देखभाल की जरूरत होती है।”

डॉ. उत्कर्ष शर्मा ने कहा कि ब्लड कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में ब्लड कैंसर की जांच और उपचार के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हुई है। यदि बीमारी की पहचान समय पर हो जाए तो उपचार की दिशा अधिक प्रभावी ढंग से तय की जा सकती है।

वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. निशांत सिन्हा ने ब्लड कैंसर के विभिन्न प्रकारों, लक्षणों, जांच एवं उपचार की आधुनिक पद्धतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने एएलएल, पीडियाट्रिक एएलएल, बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन और मल्टीपल मायलोमा सहित विभिन्न विषयों पर चिकित्सकीय जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि ब्लड कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और विशेषज्ञ चिकित्सक से समय पर परामर्श लेना आवश्यक है।मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक, डॉ. सीमा आचार्य, डॉ. मीनू गुप्ता, एचओडी रेडिएशन ऑन्कोलॉजी तथा वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. अजीत तिवारी ने भी कैंसर जागरूकता, उपचार और मरीजों के समग्र स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम के दौरान श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ योगा एण्ड नैचुरोपैथी के छात्र-छात्राओं ने योगाभ्यास के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली और स्वास्थ्य संरक्षण का संदेश दिया। कैंसर सर्वाइवर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बीमारी के दौरान सकारात्मक सोच, परिवार का सहयोग और चिकित्सकों पर विश्वास बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुभवों ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को भावनात्मक रूप से प्रेरित किया।

ब्लड कैंसर जागरूकता को रचनात्मक माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में शबीना एवं शोएब ने संयुक्त रूप से प्रथम, प्रतिभा नौटियाल ने द्वितीय तथा रश्मि ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं स्लोगन प्रतियोगिता में कल्पना प्रथम, वैशाली द्वितीय और भारती तृतीय स्थान पर रहीं। कार्यक्रम के समापन पर चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं अस्पताल के विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने “कैंसर हारेगा, जिंदगी जीतेगी” के संदेश के साथ कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।