- ‘विकसित भारत के लिए अंतरिक्ष तकनीक’ विषय पर IIRD देहरादून में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित
- राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर 20 विद्यालयों के 170 विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
- ‘विकसित भारत’ के लिए अंतरिक्ष तकनीक पर विद्यार्थियों ने जाना महत्व
देहरादून: भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आईआईआरएस), देहरादून द्वारा गुरुवार को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ समारोह के अंतर्गत “विकसित भारत के लिए अंतरिक्ष तकनीक” विषय पर विभिन्न आउटरीच गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ आईआईआरएस देहरादून के निदेशक डॉ. आरपी सिंह, डीन डॉ. शेफाली अग्रवाल एवं डॉ. हरिशंकर ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में देहरादून के 20 विद्यालयों से कक्षा 9वीं से 12वीं तक के लगभग 170 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने भाषण, चित्रकारी और प्रश्नोत्तरी सहित विभिन्न गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को आईआईआरएस के निदेशक डॉ. आरपी सिंह ने पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक ऋचा शर्मा और प्रसून कुमार गुप्ता ने किया, जबकि कार्यक्रम का संयोजन डॉ. पूनम सेठ तिवारी द्वारा किया गया। आयोजन के दौरान विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीक और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी गई तथा अंतरिक्ष तकनीक की भूमिका को लेकर जागरूक किया गया।
उल्लेखनीय है कि भारत ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ‘विक्रम’ लैंडर की सुरक्षित और सटीक सॉफ्ट लैंडिंग कराकर इतिहास रचा था। इसके साथ ही ‘प्रज्ञान’ रोवर को सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतारा गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्येक वर्ष 23 अगस्त को ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाए जाने की घोषणा की थी।