- संवेदनशील इलाकों में आपदा न्यूनीकरण कार्यो को मिली मंजूरी
- जन सुरक्षा पर फोकसः जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति ने प्रस्ताव किए अनुमोदित
देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आपदा न्यूनीकरण के उद्देश्य से संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित सुरक्षात्मक कार्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की प्रासंगिक धाराओं के तहत सशर्त मंजूरी प्रदान की गई।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा कि आपदा न्यूनीकरण से जुड़े कार्य जनहित और जन सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन्हें प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि तहसील स्तर और विभिन्न विभागों से प्राप्त नदियों के चैनलाइजेशन तथा ड्रेजिंग संबंधी प्रस्तावों को समिति ने स्वीकृत कर दिया है। विभागों को निर्देश दिए गए कि सभी आपदा न्यूनीकरण कार्यों को तेजी से पूर्ण करें। यदि किसी विभाग के पास अतिरिक्त प्रस्ताव या सुझाव हैं तो उन्हें शीघ्र प्रस्तुत किया जाए। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि भविष्य में समिति की बैठकें नियमित अंतराल पर आयोजित की जाएंगी।
अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) केके मिश्रा ने बताया कि पूर्व में आपदाग्रस्त और आपदा संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए विभिन्न विभागों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इनमें नदी चैनलाइजेशन, रिवर ड्रेसिंग और आरक्षित वन क्षेत्रों में भूस्खलन उपचार संबंधी कार्य शामिल हैं। मार्च माह में इन कार्यों को स्वीकृति दे दी गई है ताकि विभागों को कार्य पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। शेष प्रस्तावों को भी तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-507 पर यमुना नदी स्थित पुल के एबटमेंट स्कप्पर निर्माण, नदी प्रवाह चैनलाइजेशन, दोनों तटों पर कर्टेन वॉल एवं अन्य सुरक्षात्मक कार्यों को मंजूरी दी गई। साथ ही किमी 24 बोसाना और किमी 26 व्यासी में भूस्खलन उपचार, भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग पर चंद्रभागा नदी किनारे रिवर ड्रेसिंग तथा जाखन ब्रिज के अपस्ट्रीम में संचित मलबा हटाने जैसे कार्यों के लिए संबंधित अधिकारियों की संयुक्त समिति गठित की गई है। इस समिति को स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष सुखविंदर सिंह कौर, अपर जिलाधिकारी केके मिश्रा, प्रभागीय वनाधिकारी नीरज कुमार, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ओपी सिंह, राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिशासी अभियंता सुरेश तोमर, क्षेत्राधिकारी विवेक कोटियाल, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी ऋषभ कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। कई अधिकारी वर्चुअल माध्यम से भी जुड़े।
यह फैसला मानसून से पहले भूस्खलन और बाढ़ जैसी आपदाओं से जन-जान-माल की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन की सक्रियता को दर्शाता है।
