देहरादून: उत्तराखंड में लगातार कोरोना वायरस के मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है. कोरोना वायरस जिस तेजी से बढ़ रहा है, हर कोई इससे बचने का उपाय कर रहा है. कोरोना काल में शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए लोग तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं. कोई आयुर्वेदिक नुस्खा अपना रहा तो कोई विटामिन की गोलियां और जूस पीकर इम्यूनिटी बढ़ाने में जुटा है. इन सबके बीच उत्तराखंड के पहाड़ अपनी प्राकृतिक खासियतों के चलते कोरोना से लड़ने में सक्षम दिखाई दे रहे हैं. कोविड के दौरान हजारों प्रवासियों के पहाड़ों पर पहुंचने के बाद भी पहाड़ी क्षेत्रों में संक्रमितों का आंकड़ा इस बात की तस्दीक कर रहा है.
उत्तराखंड के 9 जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं की हालात किसी से छिपी हुई नहीं है. इसके बावजूद स्थानीय लोग कोरोना वायरस के मात दे रहे हैं. दरअसल, उत्तराखंड के पहाड़ों में जड़ी-बूटियों का खजाना है. यहां के उत्पादों में विटामिन, कैल्शियम, फाइबर, न्यूट्रीशियन समेत ऐसे तमाम पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद हैं. जिन्हें शरीर के लिए रामबाण माना जाता है. कोरोना काल में पहाड़ी उत्पादों की डिमांड उत्तराखंड ही नहीं बाकी राज्यों में भी काफी बढ़ गई है. जिसकी वजह से पहाड़ के इन प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ गई है.
पहाड़ के इन उत्पादों से बढ़ाएं इम्यूनिटी
पहाड़ का परंपरागत मडुंवा, गहथ, रायता, भट्ट, राजमा, चौलाई, कोदा, झंगोरा, लाल चावल, तिल, पहाड़ी हल्दी, कंडाली, काला चना, छिमी, तोर, लोबिया, काला भट्ट जैसे उत्पाद बेहद औषधीय गुणों से भरपूर हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं. कोदे में बेहद ज्यादा प्रोटीन और आयरन पाया जाता है. गहत की दाल जो बेहद ज्यादा गर्म होती है और पथरी की बीमारी का अचूक इलाज करती है.
इसी तरह पहाड़ी तोर को भी सर्दियों में शरीर को गर्माहट देने के लिए किया जाता है. काले भट्ट में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है. लोबिया दाल में बेहद ज्यादा फाइबर होता है. लाल चावल में एंटी ऑक्सीडेंट, फाइबर, जिंक कैल्शियम, विटामिन-बी होता है. कंडाली में विटामिन-ए, विटामिन-सी, विटामिन-डी और कैल्शियम जैसे तत्व पाए जाते हैं.
लोकल प्रोडक्ट्स को बढ़ावा
उत्तराखंड में कई लोग सालों से लोकल प्रोडक्ट पर काम कर रहे हैं. सरकार ने गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी वर्कर्स के जरिए पहाड़ी प्रोडक्ट भेजवाती है. कोरोना काल में पहाड़ों की शुद्ध वातावरण जड़ी-बूटी युक्त उत्पादन को बढ़ावा देते हैं. ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का काम करने वाले लक्ष्मण रावत बताते हैं कि राज्य के पहाड़ी उत्पाद की डिमांड आज देश और दुनिया बढ़ गई है. औषधीय गुण होने के कारण लोग इसका अधिक उपयोग कर रहे हैं.
चिकित्सा विज्ञान ने भी पहाड़ के व्यंजनों को सुपाच्य और संतुलित आहार बताया है. कोरोना काल में उत्तराखंड के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में पहाड़ के परंपरागत डिश की डिमांड बढ़ी है. क्योंकि पहाड़ी व्यंजनों को इम्यूनिटी बूस्टर के तौर पर देखा जा रहा है.